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बाल दिवस के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा कई जिलों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन

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बाल दिवस के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा कई जिलों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन

पटना। बाल दिवस के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा राज्य के अलग अलग जिलों में बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह, बाल यौन शोषण के खिलाफ जागरूकता अभियान व कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था द्वारा कटिहार, शिवहर, पूर्वी चंपारण, सहरसा, खगड़िया, सीतामढ़ी जिलों के विभिन्न स्थानों पर बच्चों के समूहों के बीच बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह आदि के दुष्प्रभावों के बारे में बच्चों को बताया गया, साथ ही अभिभावकों को भी संदेश दिया गया कि वे अपने बच्चों से मजदूरी न करवाएं बल्कि आवश्यक शिक्षा प्राप्त करने में बच्चों की मदद करें। इस दौरान कटिहार के इमामगंज में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के कार्यकर्ता मो. छोटू द्वारा बच्चों को जागरूकता के संदेश दिए गए और नारे लगवाए गए। इसी तरह शिवहर व अन्य जिलों में स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा बाल अधिकारों की रक्षा हेतु जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान बच्चों के बीच पुस्तक, चॉकलेट, बिस्कुट बांट कर उनके बीच स्नेह का संचार किया गया।

गौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संस्था बिहार के 16 जिलों जिसमे उपर्युक्त जिले भी शामिल हैं, में सघन जागरूकता अभियान चलाकर राज्य को बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह मुक्त बनाकर बाल मित्र बिहार बनाने की दिशा में प्रयासरत है। पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, कटिहार, अररिया, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, समस्तीपुर, शिवहर, खगड़िया, बांका जिलों में संस्था द्वारा बाल संरक्षण के मुद्दों पर जागरूकता समेत जोखिमग्रस्त परिवारों को चिन्हित करने, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने, गुमशुदा बच्चों की खोजबीन में मदद, सरकारी हितधारकों के साथ मिलकर अन्य सहयोग समेत संबंधित विषयों पर कार्य किया जा रहा है। महत्वपूर्ण है कि संस्था “सर्वाइवर लेड इंटेलिजेंस नेटवर्क” जो उन बच्चों का समूह है जिन्हें बाल मजदूरी से मुक्त कराया जा चुका है, के जरिये गाँव-गाँव मे जागरूकता व बाल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सभी संभव पहल करती है। इस क्रम में दर्जनों बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं, बाल श्रम, तस्करी के प्रयास नाकाम किये जा चुके हैं।

कोट- गरीबी, बेरोजगारी व प्राकृतिक-भौगोलिक कारणों से बिहार से बाल श्रमिको को अलग अलग राज्यों में ले जाकर बाल श्रम कराए जाने की खबरें प्रकाश में आती रहती हैं। इस लिहाज से जोखिम ग्रस्त इन जिलों में हमारे हस्तक्षेप से परिवर्तन की बड़ी संभावनाएं दिखती हैं, हमारा लक्ष्य है कि बिहार को बाल मित्र राज्य बनाएं-संतोष दुबे, प्रोजेक्ट राज्य समन्वयक, बिहार।

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