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मोदी कैबिनेट ने दिल्ली के तीनों MCD के विलय वाले विधेयक को मंजूरी दी, AAP ने निकाय चुनाव में देरी का तरीका बताया

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मोदी कैबिनेट ने दिल्ली के तीनों MCD के विलय वाले विधेयक को मंजूरी दी, AAP ने निकाय चुनाव में देरी का तरीका बताया

केन्द्रीय कैबिनेट ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों के विलय संबंधी विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी। हालांकि इस कदम से दिल्ली नगर निगम चुनावों से पहले शहर में भाजपा और आप के बीच जारी सत्ता का संघर्ष और तेज होने की संभावना है। केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली नगर निगम (संशोधन विधेयक) को संसद के मौजूदा बजट सत्र में सदन में पेश किए जाने की संभावना है। यह संशोधन दिल्ली के तीनों नगर निगमों का आपस में विलय करके उन्हें एक बनाएगा। गौरतलब है कि 2011 में दिल्ली में तीन नगर निगमों का गठन किया गया, तब से 2022 तक तीनों की सत्ता पर भाजपा का कब्जा है। वहीं, इससे पहले 2007 से 2012 तक भी नगर निगम में भाजपा सत्ता में थी। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस फैसले को दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) ने नगर निकाय चुनावों में देरी करने का ‘तरीका’ बताया, लेकिन साथ ही कहा कि नगर निगमों के विलय से चुनाव में उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आप ने दावा किया कि दिल्ली की जनता ने शहरी निकाय से भाजपा को बाहर करने का मन बना लिया है। भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के नेताओं का मानना है कि इस विलय से पार्टी को अपनी छवि बदलने और सत्ता विरोधी लहर से निपटने में मदद मिलेगी। केन्द्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि एकीकृत नगर निगम पूरी तरह से सम्पन्न निकाय होगा और इसमें वित्तीय संसाधनों का सम विभाजन होगा जिससे तीन नगर निगमों के कामकाज को लेकर व्यय की देनदारियां कम होंगी तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नगर निकाय की सेवाएं बेहतर होंगी। पूर्ववर्ती दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 2011 में तीन हिस्सों में बांटकर दक्षिण दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम का गठन किया गया। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में 1957 के कानून में कुछ और संशोधनों को भी मंजूरी दी गई है, ताकि पारदर्शिता आए, सुशासन बेहतर हो और दिल्ली के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें। सूत्रों ने बताया कि निगम का तीन हिस्सों में बंटवारा समान नहीं था और सभी निगमों के राजस्व अर्जन में भी बहुत फर्क था, जिस कारण तीनों निगमों के पास उपलब्ध संसाधनों में भी फर्क था और उनकी जिम्मेदारियों में भी। आप नीत दिल्ली सरकार और भाजपा नीत नगर निगमों के बीच पिछले कई मौकों पर तनातनी हो चुकी है। दिल्ली के तीनों नगर निगमों के 272 वार्ड के लिए चुनाव अप्रैल में होने हैं लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है। चुनाव आयोग ने स्थानीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा टाल दी है। कार्यक्रम की घोषणा नौ मार्च को ही होनी थी।हालांकि इसे लेकर भाजपा और अरविंद केजरीवाल नीत आप के बीच वाक युद्ध चल रहा है। नगर निगमों के विलय पर केन्द्र सरकार की आलोचना करते हुए आप की दिल्ली इकाई के समन्वयक और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने आरोप लगाया कि केन्द्र सिर्फ स्थानीय निकाय चुनावों को टालने के लक्ष्य से यह विधेयक लेकर आयी है, क्योंकि उसकी हार पक्की है। उन्होंने कहा कि भाजपा को नगर निगमों की सत्ता बरकरार रखने का प्रयास छोड़ देना चाहिए क्योंकि जानबूझकर की जा रही यह देरी उसका भाग्य नहीं बदल सकती। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि निगमों को तीन हिस्सों में बांटे जाने से उसकी माली हालत खराब हुई। दिल्ली सरकार भी उनकी मदद नहीं कर रही है और तीनों के विलय से नगर निगम की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी। गुप्ता ने दावा किया, ‘‘नगर निगमों के एकीकरण से सहयोग बढ़ेगा और दिल्ली का बेहतर विकास सुनिश्चित होगा। दिल्ली सरकार नगर निगमों का बकाया भुगतान नहीं कर रही है। उसे तीनों निगमों का करीब 13,000 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करना है।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘एमसीडी के एकीकरण से विकास कार्यों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों को वक्त पर वेतन मिलेगा।’’ हालांकि, कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने भाजपा नीत केन्द्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नगर निगमों का विलय भाजपा और आप का ‘सोचा-समझा कदम’ है ताकि निकाय चुनाव टाले जा सकें। उन्होंने कहा कि है एनसीडी को धन की जरूरत है, विलय की नहीं।

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