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बच्चों के साथ मनाया गया संविधान दिवस, हज़ारों बच्चों को पढ़ाया गया संविधान की प्रस्तावना

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बच्चों के साथ मनाया गया संविधान दिवस, हज़ारों बच्चों को पढ़ाया गया संविधान की प्रस्तावना

पटना। संविधान दिवस के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन द्वारा बिहार के 18 जिलों के सैंकड़ों आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी एवं निजी विद्यालयों तथा स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के हज़ारों की संख्या में बच्चों से संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया गया और उनके बीच संविधान दिवस की महत्ता, संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों को लेकर चर्चा की गई। इस क्रम में पटना, जहानाबाद, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, पुर्णिया, कटिहार, सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बांका, समस्तीपुर, शिवहर, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर तथा अररिया में बच्चो द्वारा संविधान का पाठ किया गया और उन्हें संवैधानिक अधिकारों, उनके कर्तव्य आदि के बारे में बताया गया।
गौरतलब है कि कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर देशभर के 20 राज्‍यों के 410 से अधिक जिलों में सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर लगभग एक करोड़ से अधिक बच्‍चों के साथ संविधान दिवस मनाया।
देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित—कार्यक्रम में बच्‍चों ने सरल और स्थानीय भाषा में संविधान की प्रस्‍तावना का पाठ किया। बच्‍चों को भारतीय संविधान में उल्लिखित अधिकारों, कर्तव्‍यों और उनकी मुख्‍य विशेषताओं से भी अवगत कराया गया। इस अवसर पर बच्चों ने संविधान में उल्लेखित कर्तव्यों और अधिकारों के पालन की शपथ भी ली। राज्य में आयोजित इस कार्यक्रम शिक्षक व संबंधित अधिकारी साथ रहे। पटना में प्रमुख रूप से केंद्रीय विद्यालय कंकड़बाग, पाटलिपुत्र खेल काम्प्लेक्स, रबिन्द्र विद्यालय, मदर टेरेसा स्कूल, वेल्हम्स इंटरनेशनल, फुलवारीशरीफ उच्च विद्यालय आदि समेत आंगनवाड़ी केंद्रों पर संविधान दिवस का आयोजन किया गया। बच्चों के संविधान पाठ के इस कार्यक्रम का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली से लेकर राज्य के मुख्यालय और जिला स्तर पर आयोजित किया गया। जिसमें निजी और सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी और चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन, तेजस्विनी क्‍लब, विधिक सेवा प्राधिकरण समेत बाल मित्र ग्राम, बाल मित्र मंडल सहित अन्य कई संस्थानों के बच्चों ने हिस्सा लिया। इसमें बड़े पैमाने पर दूर दराज के अति पिछड़े इलाके में रहने वाले बच्चों से लेकर आदिवासी, वंचित और हाशिए के बच्चे भी शामिल हुए। भारत में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1949 में 26 नवंबर को संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को स्‍वीकार किया गया, जो 26 जनवरी 1950 से प्रभाव में आया। भारत सरकार आजादी के 75 साल पूरे होने पर साल भर तक अमृत महोत्सव मना रही है। जिसके दौरान इस बार संविधान दिवस को बड़े पैमाने पर मनाया गया। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने भी सरकार के साथ मिलकर संविधान दिवस मनाया और इतिहास रचा। संविधान दिवस के अवसर पर किसी भी गैर सरकारी संगठन द्वारा पहली बार इतने अधिक बच्‍चों तक पहुंचा गया। दूसरी ओर इतने बड़े पैमाने पर दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले हाशिये से लेकर विशेषाधिकार सम्‍पन्‍न बच्‍चों तक को संविधान की प्रस्तावना का पहली बार एक साथ मिल कर पाठ करते देखा गया।
कार्यक्रम में बच्चों की ऐतिहासिक भागीदारी पर कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री शरद चंद्र सिन्‍हा ने कहा, “हमें यह जानकर खुशी हो रही है कि हमारे सहयोग से विभिन्न पृष्ठभूमि के गरीब और हाशिए के बच्चों ने संविधान दिवस पर हमारे संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। निचली कक्षाओं में पढ़ने वाले जो बच्चे खुद नहीं पढ़ सकते थे, उन्हें भी संविधान का पाठ पढ़ाया गया। बच्चों को संविधान में निहित प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में भी समझाया गया। हमने अपने बच्चों के बीच न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित करने और उन्हें उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने के लिए देशभर में यह कार्यक्रम किया। हम दृढ़ता से मानते हैं कि एक न्यायपूर्ण, समान और एकजुट भारत बनाने का एकमात्र तरीका हमारे संविधान में निहित उच्च मूल्यों को शामिल करना है।”

कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन द्वारा संविधान दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य सरकारों के अलावा बड़े पैमाने पर गैरसराकरी संगठनों भी हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान, उत्‍तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, हरियाणा, चंडीगढ़, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आयोजित हुए। यह कार्यक्रम बच्चों में संविधान में निहित न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित करने और उन्हें उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया गया। नई पीढ़ी को इस बात से अवगत कराया गया कि देश की एकता, अखंडता और गरिमा की हर हाल में रक्षा करनी है।

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